10 भूगोल

संसाधन

Extra Questions Answers

प्रश्न:1संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: हमारे पर्यावरण में उपलब्ध हर वह वस्तु संसाधन कहलाती है जिसका इस्तेमाल हम अपनी आवश्यकताओं की पूर्ति के लिये कर सकते हैं, जिसे बनाने के लिये हमारे पास प्रौद्योगिकी है और जिसका इस्तेमाल सांस्कृतिक रूप से मान्य है।

प्रश्न:2उत्पत्ति के आधार पर संसाधन के कौन कौन से प्रकार हैं?

उत्तर: जैव संसाधन और अजैव संसाधन

प्रश्न:3जैव संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन जैव संसाधन कहलाते हैं जो जैव मंडल से मिलते हैं। उदाहरण: मनुष्य, वनस्पति, मछलियाँ, प्राणिजात, पशुधन, आदि।

प्रश्न:4अजैव संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन अजैव संसाधन कहलाते है जो निर्जीव पदार्थों से मिलते हैं। उदाहरण: मिट्टी, हवा, पानी, धातु, पत्थर, आदि।

प्रश्न:5नवीकरण योग्य संसाधन का क्या मतलब है?

उत्तर: कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम भौतिक, रासायनिक या यांत्रिक प्रक्रिया द्वारा नवीकृत या पुन: उत्पन्न कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को नवीकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल, जीव जंतु, आदि।

प्रश्न:6अनवीकरण योग्य संसाधन का क्या मतलब है?

उत्तर: कुछ संसाधन ऐसे होते हैं जिन्हें हम किसी भी तरीके से नवीकृत या पुन: उत्पन्न नहीं कर सकते हैं। ऐसे संसाधन को अनीवकरण योग्य संसाधन कहते हैं। उदाहरण: जीवाष्म ईंधन, धातु, आदि।

प्रश्न:7अंतर्राष्ट्रीय संसाधन से क्या समझते हैं?

उत्तर: वैसे संसाधन अंतर्राष्ट्रीय संसाधन कहलाते हैं जिनका नियंत्रण अंतर्राष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा किया जाता है। इसे समझने के लिये समुद्री क्षेत्र का उदाहरण लेते हैं। किसी भी देश की तट रेखा से 200 किमी तक के समुद्री क्षेत्र पर ही उस देश का नियंत्रण होता है। उसके आगे के समुद्री क्षेत्र अंतर्राष्ट्रीय संसाधन की श्रेणी में आता है।

प्रश्न:8संभावी संसाधन किसे कहते हैं?

उत्तर: किसी भी देश या क्षेत्र में कुछ ऐसे संसाधन होते हैं जिनका उपयोग वर्तमान में नहीं हो रहा होता है। इन्हें संभावी संसाधन कहते हैं। उदाहरण: गुजरात और राजस्थान में उपलब्ध सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा।

प्रश्न:9भंडार से क्या समझते हैं?

उत्तर: कुछ ऐसे संसाधन होते हैं जो उपलब्ध तो हैं लेकिन उनके सही इस्तेमाल के लिये हमारे पास उचित टेक्नॉलोजी का अभाव है। ऐसे संसाधन को भंडार कहते हैं। उदाहरण: हाइड्रोजन ईंधन। अभी हमारे पास हाईड्रोजन ईंधन के इस्तेमाल लिये उचित टेक्नॉलोजी नहीं है।

प्रश्न:10सतत पोषणीय विकास से आप क्या समझते हैं?

उत्तर: जब विकास होने के क्रम में पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे और भविष्य की जरूरतों की अनदेखी न हो तो ऐसे विकास को सतत पोषणीय विकास कहते हैं।

प्रश्न:11भारत में संसाधन नियोजन के मुख्य बिंदु क्या हैं?

उत्तर: भारत में संसाधन नियोजन के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

प्रश्न:12संसाधनों का संरक्षण क्यों जरूरी है?

उत्तर: पृथ्वी पर संसाधन सीमित मात्रा में ही हैं। यदि उनके अंधाधुंध इस्तेमाल पर रोक नहीं लगती है तो भविष्य में मानव जाति के लिये कुछ भी नहीं बचेगा। फिर हमारा अस्तित्व ही खतरे में पड़ जायेगा। इसलिए यह जरूरी हो जाता है कि हम संसाधनों का संरक्षण करें।

प्रश्न:13भू संसाधन के तौर पर पहाड़ पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भारत की कुल भूमि का 30% पहाड़ों के रूप में है। भारत की कई नदियों का उद्गम इन्हीं पहाड़ों में है। पहाड़ों के कारण ही बारहमासी नदियों में जल का प्रवाह बना रहता है। ये नदियाँ अपने साथ उपजाऊ मिट्टी लाती हैं और मैदानों का निर्माण करती हैं। इन नदियों से मिलने वाला पानी हमारे खेतों की सिंचाई करता है। इन्हीं नदियों से हमें पीने का पानी भी मिलता है।

प्रश्न:14भू संसाधन के रूप में मैदान पर एक टिप्पणी लिखें।

उत्तर: भारत की कुल भूमि का 43% मैदान के रूप में है। मैदान की भूमि समतल होती है और इसलिए अधिकतर आर्थिक क्रियाओं के लिये अनुकूल होती है। मैदान की जमीन खेती के लायक होती है इसलिये मैदानों में घनी आबादी होती है। मकान और कल कारखाने भी समतल भूमि में आसानी से बनाये जा सकते हैं।

प्रश्न:15भू उपयोग के प्रारूप को प्रभावित करने वाले भौतिक कारण कौन कौन से हैं?

उत्तर: जलवायु, भू आकृति, मृदा के प्रकार, आदि।

प्रश्न:16भू निम्नीकरण के मुख्य कारण क्या हैं?

उत्तर: भू निम्नीकरण के कुछ मुख्य कारण हैं, वनोन्मूलन, अति पशुचारण, खनन, जमीन का छोटे-छोटे टुकड़ों में विभाजन, आदि।

प्रश्न:17जलोढ़ मृदा के गुणों का वर्णन करें।

उत्तर: जलोढ़ मृदा में सिल्ट, रेत और मृत्तिका विभिन्न अनुपातों में पाई जाती है। जब हम नदी के मुहाने से ऊपर घाटी की ओर बढ़ते हैं तो जलोढ़ मृदा के कणों का आकार बढ़ता जाता है। जलोढ़ मृदा बहुत उपजाऊ होती है।

प्रश्न:18काली मृदा के गुणों का वर्णन करें।

उत्तर: काली मृदा में सूक्ष्म कणों की प्रचुरता होती है। इसलिए इस मृदा में नमी को लम्बे समय तक रोकने की क्षमता होती है। इस मृदा में कैल्सियम, पोटाशियम, मैग्नीशियम और चूना होता है। काली मृदा कपास की खेती के लिए बहुत उपयुक्त होती है। इस मृदा में कई अन्य फसल भी उगाये जा सकते हैं।

प्रश्न:19मृदा अपरदन क्या है? यह किन कारणों से होता है?

उत्तर: मृदा के कटाव और उसके बहाव की प्रक्रिया को मृदा अपरदन कहते हैं। मृदा अपरदन के मुख्य कारण हैं; वनोन्मूलन, सघन कृषि, अति पशुचारण, भवन निर्माण और अन्य मानव क्रियाएँ।

प्रश्न:20मृदा अपरदन की रोकथाम कैसे हो सकती है?

उत्तर: मृदा अपरदन को रोकने के लिए मृदा संरक्षण की आवश्यकता है। इसके लिए कई उपाय किये जा सकते हैं। पेड़ों की जड़ें मृदा की ऊपरी परत को बचाए रखती हैं। इसलिये वनरोपण से मृदा संरक्षण किया जा सकता है। ढ़ाल वाली जगहों पर समोच्च जुताई से मृदा के अपरदन को रोका जा सकता है। पेड़ों को लगाकर रक्षक मेखला बनाने से भी मृदा अपरदन की रोकथाम हो सकती है।